वो दिल क्या जो मिलने की दुआ न करे,
तुम्हें भुलकर जिऊ यह खुदा न करे,
रहे तेरी दोस्ती मेरी जिन्दगानी बनकर,
यह बात और है जिन्दगी वफा न करे|
Sunday, 10 May 2015
वो मुहब्बत भी उसकी थी वो नफरत भी उसकी थी ,
वो अपनाने और ठुकराने की अदा भी उसकी थी !
मैं अपनी वफा का इन्साफ किस से मांगता ,
वो शहर भी उसका था वो अदालत भी उसकी थी
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